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ज्ञानभारत अभियान कलेक्टर की मौजूदगी में हुआ डिजिटल संरक्षण- �

 ज्ञानभारत अभियान कलेक्टर की मौजूदगी में हुआ डिजिटल संरक्षण-

जिले में मिली दुर्लभ पांडुलिपियां, चैबे परिवार ने सहेजकर रखी थी पूर्वजों की धरोहर

कलेक्टर अजीत वसंत की मौजूदगी में पांडुलिपियों का  हुआ डिजिटल संरक्षण

जिला अम्बिकापुर 13 मई 2026/  कलेक्टर एवं ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के जिला समिति के अध्यक्ष अजीत वसंत के मार्गदर्शन तथा जिला पंचायत सीईओ एवं समिति के सदस्य सचिव विनय अग्रवाल के निर्देशन में जिले की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने के लिए ‘ज्ञान भारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण‘ अभियान जारी है। जिसके अंतर्गत जिले में प्राचीन एवं दुर्लभ पाण्डुलिपियों के संरक्षण एवं दस्तावेजीकरण का कार्य किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखना है। अभियान के तहत जिले में विभिन्न ऐतिहासिक पाण्डुलिपियों का संग्रहण कर उन्हें ज्ञानभारतम् पोर्टल में दर्ज किया जा रहा है।इसी कड़ी में दरिमा तहसील के बरगंवा ग्राम में दो दुर्लभ पांडुलिपियां प्राप्त हुईं।

पीढ़ियों से चैबे परिवार ने सहेजकर रखी थी पूर्वजों की यह धरोहर-

पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के दौरान दरिमा तहसील के बरगंवा ग्राम में 72 वर्षीय बाल कृष्ण चैबे के घर पांडुलिपियां मिली। उन्होंने पांडुलिपियों को अपने पूजाघर में बस्ते में बांधकर रखा था। पांडुलिपियों के दो बंडल में  एक बंडल बन दुर्गा महामंत्र और दूसरा दुर्गा सप्तशती



का था।  उन्होंने बताया कि बन दुर्गा महामंत्र पांडुलिपी उनके छोटे दादा स्वर्गीय देवदत्त शर्मा ने स्याही का प्रयोग कर 27 अगस्त 1932 में हाथ से लिखा था, यह  छोटे पुस्तकनुमा आकार में है। वहीं दूसरा 183 पन्नों का दुर्गा सप्तशती पांडुलिपि लगभग वर्ष 1895-1896 में लिखा गया ही, जिसको लिखने वाले पूर्वज की जानकारी नहीं हैं


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