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महिला जागृति शिविर में नारी शक्ति वंदन पर हुआ मंथन’ ’महिला आरक्षण विधेयक से पंचायत से संसद तक बढ़ेंगे अवसर, सशक्तिकरण पर दिया गया जोर’

महिला जागृति शिविर में नारी शक्ति वंदन पर हुआ मंथन’
’महिला आरक्षण विधेयक से पंचायत से संसद तक बढ़ेंगे अवसर, सशक्तिकरण पर दिया गया जोर’









जिला कोरिया 16 अप्रैल 2026/ बैकुंठपुर के मानस भवन में आयोजित जिलास्तरीय महिला जागृति शिविर के तहत श्नारी शक्ति वंदनश् कार्यक्रम में महिला आरक्षण विधेयक पर व्यापक और सारगर्भित चर्चा की गई।कार्यक्रम में कलेक्टर श्रीमती चंदन त्रिपाठी सहित महिला जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी महिलाओं ने भाग लेकर अपने विचार रखे।


कलेक्टर श्रीमती त्रिपाठी ने कहा कि आज की महिलाएं केवल आत्मनिर्भर ही नहीं बन रही हैं, बल्कि अपने परिवार और समाज को भी सशक्त बना रही हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि महिलाओं को मिले अधिकारों के साथ-साथ निर्णय लेने की क्षमता का विकास करना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि महिलाएं अब पंच, सरपंच, विधायक और सांसद जैसे पदों तक पहुंच रही हैं, लेकिन सच्चा सशक्तिकरण तभी संभव है जब वे आत्मविश्वास के साथ स्वतंत्र निर्णय ले सकें। साथ ही उन्होंने महिलाओं के आर्थिक रूप से मजबूत बनने की आवश्यकता पर भी बल दिया।


जिले की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. श्रीमती सुरेशा चौबे ने महिलाओं को जागरूक रहने और कानून की जानकारी रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जागरूक और सुरक्षित महिलाएं ही समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं।

कार्यक्रम में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा करते हुए महिला जनप्रतिनिधियों ने इसे ऐतिहासिक कदम बताया। जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती वंदना राजवाड़े, सदस्य सौभाग्यवती कुसरो, नगर पालिका परिषद बैकुंठपुर की अध्यक्ष नविता शिवहरे और नगर पंचायत पटना की अध्यक्ष गायत्री सिंह सहित अन्य वक्ताओं ने प्रधानमंत्री द्वारा लाए गए इस विधेयक का स्वागत किया।

मानस भवन में आयोजित कार्यक्रम में सेल्फी जोन भी बनाया गया था औऱ नारी शक्ति वन्दन के समर्थन में बड़ी संख्या में महिलाओं ने हस्ताक्षर कर इस बिल का समर्थन भी किए।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं की उपस्थिति रही। महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों के साथ-साथ वकील, डॉक्टर, पत्रकार और समाज के विभिन्न वर्गों की महिलाओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई। शिविर का उद्देश्य 33 प्रतिशत महिला आरक्षण के सम्बंध में महिलाओं को जागरूक करना और उन्हें सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक रूप से सशक्त बनाना रहा। 

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